रुद्रयामल तंत्र साधना एवं सिद्धि

रुद्रयामल तंत्र साधना एवं सिद्धि

रुद्रयामल तंत्र एक पुराना तंत्र शास्त्र है। लोग तंत्र की ओर अलग-अलग वजहों से खींचते हैं और उनमें से एक वजह होती है सिद्धियों प्राप्ति, कई बार रिद्धि की प्राप्ति और कई बार मोक्ष की प्राप्ति। तंत्र शास्त्र वेद,पुराणों के बाद में लिखे गाये हैं क्यूंकि यह उनसे ज़्यादा विस्तृत भी हैं और विश्व की और निखरती सभ्यताओं से सुसज्जित भी। तंत्र के कई केंद्र भारत में बने जिन्हें शंकराचार्य के आने के पश्चात् पाया गया। कश्मीर में शैव हुए हैं, उत्त्तर भारत में बैष्णव और बंगाल में कपाली और अघोरी – काली माँ के उपासक, असम में कामाख्या के तांत्रिक। कामाख्या शक्तिपीठ है और यहाँ पर तांत्रिक पूरे भारत से शिक्षा, साधना और दर्शन के लिए आते हैं।

रुद्रयामल तंत्र साधना एवं सिद्धि
रुद्रयामल तंत्र साधना एवं सिद्धि

दक्षिण में उड़ीसा में योगिनी मंदिर है जहाँ पर ६४ योगिनियों का मंदिर है जिनकी पूजा की जाती है – इनका प्रयोग ज्योतिष में भी है। हिमाचल और उत्तराँचल में अनेक छोटे बड़े मंदिर हैं जहाँ ४०० वर्षों से ज़्यादा पुराने मंदिर हैं जिनमें सर्पों की पूजा होती है। दक्षिण में श्री रंगपटनम में वैष्णव और तमिल नाडु और केरल में शैव मंदिर हैं। कर्नाटक में वीर शैव नमक पंथ है। ज़्यादा जानकारी के लिए आप बनारस के गोपीनाथ कविराज की दर्शन पे किताब पढ़ें।

रुद्रयामल तंत्र साधना के लिए आपको रुद्रयामल तंत्र नामक ग्रन्थ पढ़ना चाहिए। यह संस्कृत में है, बाकी सब तांत्रिक शास्त्रों की तरह। साधना में लीन होकर लक्ष्य के लिए एक सूत्री हो जाना एक आम बात होनी चाहिए। यह एक आम बात है की रुद्रयामल तंत्र संधना में कुंडलीणी जागृत होगी और आप अधिकांश रूप से अपनी व्यावहारिक ज़िन्दगी से दूर हो जायेंगे। पर कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो पड़ता ही है। अगर आप मन चाहा फल चाहते हैं तो आपको मंत्र विज्ञान की भी समझ की ज़रुरत नहीं है।

अगर आप किसी चीज़ की इच्छा रखते हैं और उसे पाने के लिए तंत्र साधना करना चाहते हैं – मंत्र जपना चाहते हैं तो आपको पहले ये समझ लेना चाहिए की लक्ष्य के प्रति आपकी कितनी चाह है इसके मद्देनज़र अगर आप केवल अपने लक्ष के नाम को ही जपें तो वह काफी होगा! आप पाएंगे की आप जैसे-जैसे दिन-ब-दिन अपने लक्ष्य का नाम जप रहे हैं वैसे ही वैसे आप अपने लक्ष्य के करीब जा रहे हैं। मन्त्र अगर आप किसी देवी या देवता का जपना चाहते हैं तो सिर्फ उनके नाम को लय में जपने से आप अपने कार्य को कर पाएंगे – लय से मतलब है की आप सही उच्चारण करके और सही स्वर में मंत्र बना के उसका इस्तेमाल करते हैं तो आपकी मंत्र सिद्धि पूरी हो जाएगी।

आप यह गिन लें की मंत्र में कितने अक्षर हैं – जो आपने अपने लक्ष्य अनुसार बनाया है – उसमें से हर एक अक्षर के लिए एक हज़ार बार मंत्र जाप होगा यानी अगर मंत्र में ४० अक्षर हैं तो मंत्र का जाप ४०००० बार होगा। इसमें से दशांश बार तरपण करें यानी उदाहरण अनुसार ४००० बार मंत्र के अंत में तर्पयामि लगाके बोलें, दशांश बार मार्जन करें यानि ४००० बार मंत्र के अंत में मार्जनम लगाके बोलें। ४००० बार हवन करें यानी स्वाहा लगाकर पूरा मन्त्र बोलें तो आपके कार्य में आपको सफलता मिलेगी। इस तरह ४००० में खाना किसी ब्राह्मण को खिलाकर और दक्षिणा देकर ख़ुशी-ख़ुशी विदा करें ताकि काम शुभ तरीके से हो।

अब आप अपने गुरु के नाम पे मंत्र जाप करें तो उससे भी आपके मंत्र में शक्ति आ जाती है। आप चाहे गुरु का नाम सम्बोधित करके मंत्र बोलेन या फिर गुरु को गुरूजी के नाम से सम्बोधित करके मन्त्र बोलें तो आपके काम में कारगरता आएगी। आप अपने इष्ट देव के नाम पे मंत्र जाप करें तो उससे भी आपके मन्त्र में शक्ति आ जाती है। आप चाहे इष्ट देव को नाम से सम्बोधित करें या फिर इष्ट देव के नाम से सम्बोधित करके मन्त्र बोलेन तो आपके काम में असर आएगा। आप अपने मनचाहे संत को भी अपने मंत्र जाप में सम्बोधित करके मंत्र पढ़ें चाहे उन्हें उनके नाम से सम्बोधित करें या फिर संत नाम से ही सम्बोधित कर लें आपके मंत्र में ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जायेगा।

आप अपनी बुद्धि और विवेक से जो कुछ और ज़रूरी और धार्मिक रूप से सुनिश्चित करने पर सही लगे अपने मंत्र में जोड़ लें। आप पाएंगे की अगर आपने सही तरह से मन्त्र को पिरोया है और मंत्र में शक्ति प्रवाहित हो रही है तो आप आनंदित लहरों में डूब उठेंगे, आप मन-चित लगाकर मंत्र जप में लीन हो जायेंगे और आपके कार्य में कोई रुकवाट भी नहीं  आएगी। अगर आपके कार्य में बाधाएं आ रही हैं और आप सफलता पूर्वक मंत्र साधना एकांत में बैठ कर नहीं कर पा रहे तो ऐसा करें की सवेरे प्रातः काल उठ जाएं, स्नान कर लें और साफ़ और, हो सके तो, लाल कपडे पेहन लें। अब आप पूजा कक्ष में जाएं या फिर बाहर किसी मंदिर में जाएं और वहां पर गणेश भगवन को धूप-दीप दिखाएं, उनको ॐ गम गणपतये नमः जप से सम्बोधित करें, गणेश जी को लडडू का प्रसाद चढ़ाएं और फिर घर आ के, मंत्र का जप पुनः प्रारम्भ करें। आप पाएंगे की विघ्ननिवारक, लम्बोदर गणेश भगवन की कृपा से आपके काम में और कोई रुकावट नहीं आएगी।

इस तरह हमने आपके समक्ष आज रूद्रयामल तंत्र शास्त्र की साधना एवं सिद्धि रखी है। आप पाएंगे की अगर आप साफ़ दिल से और बिना किसी को हानि पहुँचाने के मकसद से यह साधना शुरू करते हैं तो कोई परेशानी नहीं आएगी पर अगर आप कोई मन-मिटाव रखते हैं तो फिर शायद आपको दिक्कतों का सामना करना पड़े। आखिर में हम आपसे यह अनुरोध करेंगे की आप अगर विधि में कोई शंका पाएं – की कोई सामग्री कैसे लानी है, मंत्र के बारे में असमंजस हों या फिर कोई और कारण से समझने में असमर्थ हों तो आप किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श कर लें – वह आपको बता पायेगा की आप किस प्रकार कौन सी विधि करें। अगर आपके मन्त्रों में दिक्कत हो तो किसी अच्छे और सिद्ध तांत्रिक के पास जाकर अपनी बात रख कर रुद्रयामल तंत्र से जुड़े मन्त्रों में दीक्षा लेने के लिए अनुरोध करें।

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टोने गुरूजी

वशीकरण टोने गुरूजी वशीकरण टोने तंत्र विद्या की एक शैली है, जिसमे किसी को अपने काबू मे करने के लिए उस व्यक्ति विशेस की पसंद की कोई चीज़ हासिल की जाती है फिर उस चीज़ को वशीकरण मंत्र के द्वारा सिद्ध किया जाता है. उसके बाद वशीकरण पूजा की जाती है तथा फिर उस चीज़ को एक नियत दिन, समय पर व्यक्ति विशेस पर आजमाया जाता है. ये क्रिया एक योग्य वशीकरण गुरु के द्वारा सम्पादित की जाती है. कोई भी वशीकरण टोना की सफलता एक योग्य गुरु पर निर्भर करती है.