कर्ण पिशाचिनी प्रयोग सिद्धि

कर्ण पिशाचिनी प्रयोग सिद्धि

यह विद्या को करने के कई तरीके है , पर सबसे सफल तरीका अघोरी  का है , यह पिशाच को पाने का तरीका होता है ,जिस तरह हम ईश्वर आराधना करते है वैसे यह को प्राप्त करने के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है,  जितना  कठिन मार्ग ईश्वर को प्राप्त करने का है ,उतना ही कठिन मार्ग पिशाच को प्राप्त करने का है , जप, तप , साधना , उपवास आदि, अघोरियो का तरीका अत्यंत कठिन है , अतः लोग इसे सामान्य तरीके से करते है|

कर्ण पिशाचिनी प्रयोग सिद्धि
कर्ण पिशाचिनी प्रयोग सिद्धि

कर्ण पिशाचिनी मंत्र द्वारा –

यह सिद्धि करने के लिए आप को अपने गुरु का साथ लेना होगा और उनसे सिद्ध किया गया मंत्र  , यह मंत्र  को सिद्ध करने में ही  सात वर्ष का समय लग जाता है ,  अतः किसी के बहकावे में न आये यदि किसी ने बिना सिद्ध किया गया मंत्र आप को दे दिया  तो यह उस गुरु की जान ले लेता है और कर्ण पिशाचनी अपने साथ ले जाती है और युगों युगों तक मुक्ति नहीं मिलती|

कर्ण पिशाचनी –

इसकी माता यक्षिणी है , यक्ष वो देवी देवता होते है जो श्रापित होते ,यह किसी कर्म का दंड प्राप्त कर रहे होते है , यह माफ़ नहीं करते और हर इच्छा को पूरा करते है यह मानव में वासना के गुण के रूप में आते है , यक्ष भी दर्शन देते है , यह भी देवी रूप में भक्त की हर इच्छा को पूर्ण करते है , ममता से भरी होती है , यह कोई भी मनोकामना पूर्ण कर सकती है जो कोई देवी देवता कर सकते है , यह स्वर्ग से निष्कासित देवी देवता होते है, इनका रहने का स्थान श्मशान होता है यह किसी घर यह पूजा के स्थल में नहीं रह सकती , यह रात्रिचर होते है इनको आहार में मानव रक्त, कच्चा माँस अत्यंत प्रिय है ,यह जब दर्शन देती है तब साधक की सभी शक्तियां अपनी तरफ खींच लेती है ,अगर इनका उपयोग अपने स्वार्थवश किया तो यह मार देती है|

कर्ण पिशाचिनी साधना –

१-यह साधना शीघ्र फल देने वाली होती , यह साधना में आवश्य सिद्धि प्राप्त होती है , इस साधना के बाद व्यक्ति को भूत भविष्य हर तरह का ज्ञान हो जाता है , वो अजय हो जाता है कर्णपिशाचिनी साधना अपने गुरु के निर्देश में ही करे , और उनसे समय समय पर मार्गदर्शन लेते रहे , इस साधना में आप को आपके  गुरु द्वारा दिया गुप्त मंत्र का ग्यारह लाख बार जप करना होता है ,पर यह ध्यान रखना होता है कि कोई त्रुटि न हो , इसमें शुद्ध होकर रात्रि में काँसे थाली में त्रिशूल बना कर उस त्रिशूल की आराधना करनी चाहिए और प्रातःकाल  शुद्ध होकर शुद्ध गाय के दूध से बना हुआ देशी घी का दीपक जलाना चाहिए , साथ में ग्यारह सौ बार अपने गुप्त मंत्र जाप करना चाहिए। यह सब क्रिया गुरु के निर्देशानुसार होनी चाहिए , इसी प्रकार रात्रि में त्रिशूल की पूजा कर ग्यारह सौ बार जप करना चाहिए और कुछ त्रुटि हो जाती है आपसे तो आप पागल तक हो सकते है, यह साधना काले वस्त्र धारण करके ही करनी चाहिए|

 

२- साधना को  दिवाली यह होली के ग्रहण से प्रारम्भ करना चाहिए  रात में पहले आम पाटे पर गुलाल बिछा ले और अनार की लकड़ी से कलम बनाकर एक सौ आठ बार मंत्र लिखे और मिटाये साथ में उच्चारण करते हुए ग्यारह सौ बार मंत्र का जप करे , और मंत्र जप करने वाला साधक जिस कमरे में सोए उस कमरे में कोई नहीं सोये और साधक को वहाँ ही सोना चाहिए  जहाँ पर उसने उस पाटे पर मंत्र लिखा हो ,ऐसा इक्कीस दिन करे और पाटे को सरहाने रख कर सोये और इस तरह इक्कीस दिन करे , यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा ।

साधना मंत्र –

ॐ नम: कर्णपिशाचिनी मातः कारिणी प्रवेसः अतीतानागतवर्तमानानि सत्यं कथन स्वहः

३- यह साधना काले ग्वारपाठे को सिद्ध करके उनका लेप दोनों हाथों और पैरों में  पर लगा कर किया जाता है ,  तथा मध्य रात्रि में  इक्कीस दिनों तक प्रतिदिन पाँच हजार बार जप करने से  यह मंत्र सिद्ध हो जाता है यह जप गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिये , मंत्र सिद्ध होने के बाद आप को वो बाते भी सुनाई देगी जो आम आदमी नहीं सुन सकता । आप की सभी इच्छाओं की पूर्ति होगी पर आप किसी से अपने किसी निजी स्वार्थ के लिए इसका प्रयोग न करे  ,ऐसे में यह विपरीत फल देता है साधक पागल यह उसकी मृतु भी हो सकती है ,

साधना मंत्र-

ॐ ह्यीं नमोहः भगवतीयः कर्णपिशाचिनी चंडवेगिनी वद वद स्वहः ।

४- कर्णपिशाचिनी की साधना को गोपनीय माना जाता है , यह साधना गुरु के मार्गदर्शन के बिना नहीं हो सकती अतः गुरु का होना आवश्यक है , इस साधना के लिए आप को गाय के गोबर में सेंधा नमक मिलाकर उस स्थान को लीपना चाहिये जहाँ यह पूजा आपको करनी है ,फिर सूखने के बाद उस स्थान पर कुमकुम, हल्दी ,अक्षत डालकर उसके ऊपर कुश का आसन बिछाना चाहिए और विधि पूर्वक रुद्राक्ष की माला लेकर ग्यारह दिन तक प्रतिदिन दस हजार मंत्र का जप करना चाहिये , कर्णपिशाचिनी ससिद्ध हो जाती है और आप की सभी इच्छा की पूर्ति करती है ।

साधना मंत्र-

ॐ ह्शो ह्सा नमोहः भग्वतिह्  कर्णपिशाचिनी चंडवेगिनी स्वहः ।

५- कर्ण पिशाचनी इस साधना में साधक को। मध्य रात्रि में  लाल वस्त्र धारण करके अपने  समक्ष एक शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाकर इक्कीस दिन तक रोज दस हजार बार इस मंत्र का जप करना चाहिए , माँ कर्णपिशाचिनी सिद्ध हो जाती है

साधना मंत्र-

“ॐ भगवतः चंडीकेहः पिसचनीयः स्वहः ”

 

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टोने गुरूजी

वशीकरण टोने गुरूजी वशीकरण टोने तंत्र विद्या की एक शैली है, जिसमे किसी को अपने काबू मे करने के लिए उस व्यक्ति विशेस की पसंद की कोई चीज़ हासिल की जाती है फिर उस चीज़ को वशीकरण मंत्र के द्वारा सिद्ध किया जाता है. उसके बाद वशीकरण पूजा की जाती है तथा फिर उस चीज़ को एक नियत दिन, समय पर व्यक्ति विशेस पर आजमाया जाता है. ये क्रिया एक योग्य वशीकरण गुरु के द्वारा सम्पादित की जाती है. कोई भी वशीकरण टोना की सफलता एक योग्य गुरु पर निर्भर करती है.